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Sunday, December 16, 2018

Types of Professional Misconduct



Types of Professional Misconduct

हेलो दोस्तो आज हम बात करने वाले हैं Professional Misconduct के बारे में, तो है क्या Professional Misconduct.

Professional Misconduct को हिंदी में व्यवसायिक  दुराचरण कहा जाता है।

व्यवसायिक  दुराचरण किसे कहते हैं ?

विधि व्यवसाय में वकीलों का यह कर्तव्य है कि वे वह अपनी विर्तीक आचार संहिता का पालन करें और कोई ऐसा कार्य ना करें जो विधि व्यवसाय की गरिमा के प्रतिकूल है वकीलों द्वारा विधि व्यवसाय की गरिमा के प्रतिकूल किए गए कार्य तथा आचरण को व्यवसायिक दुराचरण कहा जाता है वेबसाइट द्वारा चरण वकील के सामान्य व्यवसाय पक्षकार या न्यायालय के प्रति हो सकता है ।

कुछ विधि शास्त्रियों के अनुसार प्रत्येक वकील के व्यापक अधिकार होते हैं यह अधिकार भी कर्तव्य और आभार के दायित्व हीन होते हैं इन कर्तव्य तथा आभार ओं का उल्लंघन ही व्यवसायिक दुराचरण माना जाता है विधि व्यवसाय में वकीलों का व्यवसायिक दुराचरण बहुत हानिकारक होता है।

Types of Professional Misconduct
Types of Professional Misconduct





व्यवसायिक दुराचरण होता क्या है ?

विभिन्न न्यायिक निर्णय के अनुसार न्यायालय में आपत्तिजनक भाषा और शब्दों का प्रयोग करना, न्यायालय में अनावश्यक उत्तेजित होना,  न्यायिक निर्णयों,  आदेशों आदि पर अनावश्यक टिका टिप्पणी करना,  न्यायाधीश पर झूठे आरोप लगाना,  न्यायालय में पक्षों की ओर से झूठे वाद प्रार्थना पत्र,  शपथ पत्र, और अन्य कूटरचित दस्तावेज पेश करना,  पक्षों की ओर से न्यायालय में हाजिर न होना,  पक्षों के मामलों की निष्ठापूर्वक पैरवी ना करना,  पक्षकारों को गलत कानूनी राय देना,  विधि व्यवसाय के अलावा अन्य व्यवसाय करना,  आदि सभी को व्यवसायिक दुराचरण माना गया है ।

जस्टिस दास ने कहा था कि भारत में विधि व्यवसाय विकास उन्मुख नहीं हो रहा है केवल परंपरागत रूप से विधि को खोज कर विवाद के तथ्य में लागू कर देना ही वकील का कार्य नहीं है क्योंकि राज्य का स्वरूप जनकल्याणकारी है अतः उसकी उत्तरदायित्व मर गए हैं और यदि वर्तमान विधि व्यवसाय उसी घिसे पिटे रास्ते पर चलती है तो पेशा प्रगतिशील नहीं रहेगा फ्रांस में वकीलों को संबोधित करते हुए लुईस 14 ने कहा था की शायद हमारे व्यवसाय में अंधी दुस्साहिकता स्थाई स्थान पर आ चुकी है और योग्य ने होने के बावजूद भी लोग इस पेशे में आ रहे हैं जिन्हें ओर भी अत्यधिक परीक्षण करना पड़ता है इस व्यवसाय में परीक्षण ना करना भी व्यावसायिक दुराचरण कहलाता है यद्यपि आज हम विधि व्यवसाय के संदर्भ में व्यवसायिक दुराचरण की इतनी व्यापक परिभाषा स्वीकार नहीं कर सकते फिर भी इस व्यवसाय में रहकर परीक्षण न करना नैतिक दुराचरण तो है ही ।

व्यवसायिक दुराचरण विभिन्न परिस्थितियों में पैदा हो सकता है

मुख्यत व्यावसायिक दुराचरण 3 प्रकार से होता है :

1. सामान्य व्यवसाय से संबंधित और दुराचरण ।   2. न्यायालय के प्रति दुराचरण ।    3. मुवक्किल के प्रति दुराचरण ।



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