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Sunday, November 18, 2018

भारतीय दंड संहिता 1860 सेक्शन 3 और 4 क्या है ?

भारतीय दंड संहिता 1860 सेक्शन 3 और 4 क्या है ?


Detail - वे अपराध जो भारत में न रहते हुए किए जाते हैं लेकिन भारत में रहकर किए जाते तो अपराध की श्रेणी में आते तथा इस द्वारा किए गए सभी प्रकार के अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 3 के अंतर्गत आते हैं 


उदाहरण - 

राम विदेश जाकर किसी का खून कर देता है और भारत भाग कर आ जाता है तो भारतीय न्यायालय उसे विदेश में किए गए खून के लिए सजा दे सकती है क्योंकि खून करना विदेश में भी अपराध है और भारत में भी !

अगर वह ऐसा कार्यकर्ता जो विदेश में अपराध है लेकिन भारत में नहीं तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 3 के अंतर्गत दोषी नहीं होगा !
आईपीसी सेक्शन 3 के अंतर्गत वे ही अपराध आते हैं जो दूसरे देश में मैं रहकर किए जाते हैं और साथ ही वे अपराध भारत में भी अपराध की श्रेणी में आते हो !




इस संहिता के कुछ महत्वपूर्ण उपबंध :-


1. भारत से बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा 
2. भारत में रजिस्ट्री कृत किसी पोत या विमान पर,चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा,किए गए किसी अपराध को भी लागू है 

कोई व्यक्ति किसी स्थान में भारत से बाहर और परे कोई अपराध भारत में स्थित कंप्यूटर साधन को लक्ष्य बनाते हुए करता है तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 4 के अंतर्गत अपराधी होगा या अपराध की श्रेणी में आएगा 

उदाहरण - राम जो भारत का नागरिक है युगांडा में हत्या करता है वह भारत के किसी स्थान में या जहां भी वे पाया जाए हत्या के लिए वैचारित और दोष सिद्ध किया जा सकता है !

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